मशाल

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कल और आज

मकसद क्या है हमारा, किसे है पता

आज तो बस मैँ बीते कल की सोच कर सो जाऊँगा

और कल आज की

फिर कभी शायद एक दिन ऐसा आए

आने वाले कल की सोची जाऐ

पर इन सब सोच विचारों में

कहीँ मेरा आज गुम ना हो जाए..

गुम हो भी गया ये आज मेरा तो ऐ खुदा

कम से कम आने वाला कल सँवर जाए

वो कल सुहाना लगता है आज

इस शर्त पे कि तुम ये जियो ना आज

कितने बरस बीत गये मुझे ये घिसते हुए आज

नज़र नहीँ आता वो कल कहीँ आस पास..

नज़र आई तो अंत में वो घड़ी, जो बताती मुझे क्या है कल और क्या है आज

मरोड़ दिया नाज़ुक हाथों को उसके

जिन्होंने तरसाया मुझे दिन-रात, कल और आज

फिर कौन था बताने वाला मुझे कि क्या है कल और क्या है आज

अब तो कल भी था आज और कल भी है आज

पता चल गया मुझे अंत में कि अपना मकसद ही है आज

 

खुदा है भी

किस नाम से पुकारूँ तुझे, कैसे तेरी तारीफ़ करूँ

खुदा है भी तो तुझपे यकीं कैसे करूँ

कोई पुकारे राम कोई अल्लाह तो कोई यीशू

इतना नादां भी नहीँ कि अपना नाम ही ना जाने तूँ

क्या है तूँ सबके लिये अलग या फेर लिया तुने सबसे ही मूहँ

खुदा है भी तो तुझपे यकीं कैसे करूँ

शिकायतेँ बहुत हैँ तुझसे, उन्हें बयाँ कैसे करूँ

मिला भी बहुत है कुछ, पता नहीँ किस्मत है या तूँ

खुदा है भी तो तुझपे यकीं कैसे करूँ

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Fly

In all her glory, she flew in the sky

Fluttered her wings as trees passed by

She was the restless kind,

Wondering how it felt to fly a little bit high

All eyes gazing at her, she was everything but shy

In her mind, she was conquering the sky

Her wings failed her but the spirit held high

They said “well try”, but you cannot fly that high

For you are not a bird, just a butterfly

And then…she gave it another try

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